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by : Tapsi Sharma

सिर मुंडवा कर सोनू निगम ने मांगे 10 लाख, अपने बयान से पलट गए मौलवी साहब

नई दिल्ली : सोनू निगम के खिलाफ फतवा जारी करने वाले सैयद साह अतेफ अली अल कादरी को बॉलीवुड सिंगर ने करारा जवाब दिया है. सोनू निगम ने अपना सिर खुद ही मुंडवा लिया है और अब वे कादरी साहब से 10 लाख रुपए मांग रहे हैं.


सोनू के 10 लाख रुपए मांगने के बाद फतवा जारी करने वाले मौलवी अपने बयान से पलट गए हैं. अब वे कह रहे हैं कि सिर मुंडवाने की बात उन्होंने नहीं कही थी.

उनका कहना है कि उन्होंने कहा था कि जो भी सोनू निगम को फटे जूतों की माला पहनाएगा और पूरे देश में घुमाएगा, उसे दस लाख रुपयों का ईनाम दिया जाएगा.

सोनू निगम ने अपने बाल कटवा लिए हैं. सोनू निगम ने कहा कि मेरा उद्देश्‍य किसी को चोट पहुंचाना या किसी की भी धार्मिक भावनाओं को आहत करना नहीं था. उन्‍होंने दुख जताया है कि लोगों ने उनका मुद्दा समझने के बजाए उनकी बात को पकड़ा और उसके खिलाफ विवाद खड़ा कर दिया. 
सोनू ने अपने दावे को पूरा करते हुए अपना सिर मुंडवा का फैसला लिया है और इस काम के लिए उन्‍होंने अपने मुस्लिम दोस्‍त आलिम को चुना. आलिम हकीम सेलेब्रिटी हेयरस्‍टाइलिस्‍ट हैं. सोनू निगम ने कहा, मैं सोच भी नहीं सकता था कि इतनी छोटी सी बात इतनी बड़ी बन जाएगी.
बता दें कि सोनू निगम ने सोमवार (17 अप्रैल) की सुबह मस्जिदों में होने वाली अज़ान पर बयान दिया था, जिस पर काफी बहस छिड़ गई थी. वेस्ट बंगाल माइनॉरिटी यूनाइटेड काउंसिल के उपाध्यक्ष सैयद साह अतेफ अली अल कादरी ने सोनू निगम का सिर मुंडवाने और जूते की माला पहनाने की बात कही गई थी.
कादरी ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति सोनू निगम का सिर मुंडवाएगा, फटे जूतों की माला पहनाएगा और पूरे देश में घुमाएगा तो वे उसे अपने पास से 10 लाख रुपए का इनाम देंगे. सोनू निगम ने भी इसका करारा जवाब दिया है. सोनू ने अपना सिर मुंडवा लिया है और मौलवी से अब 10 लाख रुपए मांग रहे हैं.
डीएनए में छपी एक खबर के मुताबिक, कादरी ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि किसी को दूसरे धर्म के लोगों की भावनाओं को आहत करने का अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि मंदिर के बारे में भी कोई इस तरह की बात करता तो ऐसे ही वे प्रतिक्रिया देते.
अपने नाम का फतवा जारी होने के बाद बुधवार सुबह सोनू निगम ने ट्वीट किया था.


कादरी ने तो यहां तक कह दिया कि सोनू निगम जैसे लोगों को देश के बाहर कर देना चाहिए. इसके साथ ही संस्था के महासचिव साबिर अली ने कहा कि गायक सोनू निगम ने पब्लिसिटी के लिए इस तरह की बात ट्वीट पर लिखी है.
 


मैं मुसलमान नहीं हूं, फिर भी जबरन अज़ान की वजह से जागना पड़ता है : सोनू निगम

उन्होंने कहा कि मुस्लिम सुबह नमाज के लिए उठते हैं तो हिंदू सूर्य नमस्कार के लिए सुबह उठते हैं. ऐसे में सुबह उठना तो ठीक है. उन्होंने यहां तक कह दिया कि सोनू निगम पीछे हो रहे हैं और अर्जित सिंह को ज्यादा काम मिल रहा है. इस मुद्दे पर सोनू निगम ने भी ट्वीट कर इस बारे में पूछा है किक्या यह धार्मिक गुंडागर्दी नहीं है?’

बता दें कि सोनू निगम ने लिखा था कि सुबह लाउडस्पीकर से दी जाने वाली अजान से उनकी नींद खराब होती है और जब वह मुस्ल‍िम नहीं हैं तो वह इस धार्मिक कट्टरता को बर्दाश्त करें. ऐसा करना तो सरासर गुंडागर्दी है. हालांकि, सोनू निगम ने अपने निशाने पर मंदिर और गुरुद्वारों में बजने वाले लाउडस्पीकर को भी लिया था.
 
Title: Sonu Nigam Demands 10 Lakh Rupees after Shaving Head Muslim Cleric Turned Upside Down With His Statement
 
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by : Tapsi Sharma

 1 मई से मंत्रियों की गाड़ियों पर नही मिलेगी यह बाली बत्ती


दिल्ली:-कैबिनेट ने केंद्रीय मंत्रियों की लाल बत्ती वाली गाड़ियों पर पाबंदी लगा दी है।ये फैसला एक मई से लागू हो जाएगी। आज वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संवाददाता सम्मेलन करके इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा, लाल बत्ती के इस्तेमाल पर एक मई से रोक लग जाएगी। एक मई से सड़कों चलने वाली मंत्रियों की गाड़ियों पर लाल बत्ती नहीं दिखेगी।वहीं ये फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ दिया गया है। 

1 मई से मंत्रियों की गाड़ियों पर नही मिलेगी यह बाली बत्ती


हालांकि राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस और लोकसभा स्पीकर को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। दरअसल, वीवीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए ये कदम उठाया गया है। नियमों के मुताबिक 32 केंद्रीय मंत्रियों को लाल बत्ती इस्तेमाल की अनुमति दी जाती है, लेकिन राज्य में मंत्रियों के पास अधिक से अधिक लाल बत्ती की गाड़ियां हैं। 

इसी को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया गया है।पीएमओ से बातचीत के बाद ही सड़क परिवहन की ओर से ये कदम उठाया गया है।
by : Tapsi Sharma

विजय माल्या लंदन में गिरफ्तार, इंडिया से था भगौड़ा घोषित।


भारतीय कारोबारी विजय माल्या को लंदन में गिरफ्तार कर लिया गया है. विजय माल्या को वेस्टमिंस्टर कोर्ट के आदेश के बाद गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तारी के बाद माल्या को कोर्ट में पेश किया जाएगा. बता दें कि विजय माल्या को भारत सरकार ने भगोड़ा घोषित कर रखा है. माल्या पर इंडियन बैंकों से 9 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज लेने का आरोप है.


विजय माल्या लंदन में गिरफ्तार, इंडिया से था भगौड़ा घोषित


क्या है माल्या का मामला?

इससे पहले, ब्रिटेन की सरकार ने भारत के प्रत्यर्पण के आग्रह को जिला जज को भेज दिया था. यह माल्या को भारत लाने और उन पर मुकदमा चलाने की दृष्टि से पहला कदम था. माल्या की बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस पर बैंकों का 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बकाया है.  

विजय माल्या लंदन में गिरफ्तार, इंडिया से था भगौड़ा घोषित


क्या भारत ला पाएगी मोदी सरकार?

माल्या की गिरफ्तारी के बाद अब सबका ध्यान इस बात पर है कि क्या मोदी सरकार माल्या को भारत ला पाएगी. माल्या के देश छोड़ने के बाद विपक्ष ने मोदी सरकार पर करारा हमला बोला था. सरकार ने ऐलान किया था कि माल्या को वापस लाया जाएगा. इसके बाद ईडी औऱ सीबीआई समेत तमाम एजेंसियां माल्या को घेरने में जुट गई थीं. भारत ने ब्रिटेन से माल्या को लाने के लिए कूटनीतिक चैनल का भी इस्तेमाल किया और ब्रिटेिश सरकार को चिट्ठी भी लिखी थी. अब गिरफ्तारी के बाद सरकार सारी प्रक्रियाओं को पूरा कर माल्या को वापस लाने की कोशिश करेगी.

मोदी सरकार ने कहा- किसी को नहीं बख्शा जाएगा

माल्या की लंदन में गिरप्तारी के बाद मोदी सरकार ने कहा है कि सरकार भ्रष्टाचार के मामले को लेकर सख्त है. वित्त राज्य मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा. सरकार अपनी ओर से पूरी कोशिश की जाएगी.

पिछले साल से हैं ब्रिटेन में

माल्या पिछले साल दो मार्च को ब्रिटेन चले गए थे. जबकि इसके कुछ दिन बाद ही उच्चतम न्यायालय ने माल्या को अपने पासपोर्ट के साथ व्यक्तिगत रूप से 30 मार्च, 2016 को पेश होने को कहा था. भारत ने इस साल आठ फरवरी को औपचारिक तौर पर ब्रिटेन सरकार को भारत-ब्रिटेन प्रत्यर्पण संधि के तहत माल्या के प्रत्यर्पण का औपचारिक आग्रह किया था
by : Tapsi Sharma

योगी सरकार में बदल दिए गए लखनऊ के इन चौराहों के नाम, जाने क्या है नये नाम


लखनऊ : यूपी में योगी सरकार के गठन के बाद प्रदेश में कई बड़े बड़े बदलाव नजर आने लगे हैं| कहीं एंटी रोमियो स्क्वॉड ने तो कहीं सफाई अभियान ने सरकारी दफ्तरों की दशा बदल दी है| इसी कड़ी में राजधानी लखनऊ में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला| 

योगी सरकार में बदल दिए गए लखनऊ के इन चौराहों के नाम, जाने क्या है नये नाम


गौरतलब है की योगी सरकार ने लखनऊ में चार चौराहों के नाम बदल दिए है| वहीं सूत्रों की माने तो आने वाले वक्त में योगी सरकार और भी कुछ चौराहों के नाम बदल सकते हैं|

बता दें, कि लखनऊ के विधानसभा गेट नम्बर-7 का नाम बदलकर ‘राजा विजय कुमार त्रिपाठी मार्ग’ रख दिया गया है| गोमती नगर के मलिक टिम्बर का नाम बदलकर ‘शहीद भगत सिंह चौक’ रखा गया है| गोमती नगर के ही हुसड़िया चौराहे का नया नाम ‘शहीद चंद्रशेखर चौक’हो गया| वहीं अब विधानसभा का नाम ‘बाबा साहब अम्बेडकर मार्ग’ से जाना जाएगा|
by : Tapsi Sharma

बैलेट पेपर से नहीं, EVM से ही होंगे यूपी नगर निगम के चुनाब।

लखनउ:-यूपी निर्वाचन आयोग ने अब बैलेट के बजाए प्रदेश के नगर निगमों के चुनाव इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन से ही करवाने का फैसला किया है। इससे पहले केन्द्रीय चुनाव आयोग द्वारा पुरानी ईवीएम में खराबी की शिकायतें बढ़ने से प्रदेश में होने वाले नगर निगम चुनाव में यह मशीनें देने से इनकार करने के चलते आयोग ने चुनावों को ईवीएम के बजाए बैलेट से करवाने का फैसला किया था।

बैलेट पेपर से नहीं, EVM से ही होंगे यूपी नगर निगम के चुनाब


केंद्रीय निर्वाचन आयोग से हाल ही में हुए पत्राचार के बाद मध्य प्रदेश से इन मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित होने के बाद अब राज्य निर्वाचन आयोग ने अपने पूर्व के फैसले में बदलाव कर दिया है। अब नगर निगम के चुनाव ईवीएम से ही कराए जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग के फैसले में इस बदलाव के पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त रूख भी एक प्रमुख कारण के रूप में सामने आ रहा है।

दरअसल, राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पूर्व में नगर निगम के चुनाव ईवीएम के बजाए बैलेट पेपर से करवाए जाने का फैसला लिया था और बाकायदा इसके लिए कागज की आपूर्ति के टेण्डर की प्रक्रिया भी पूरी कर दी थी। मगर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जाहिर की थी। आयोग द्वारा सोमवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा आवश्यकतानुसार ईवीएम के आवंटन के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश नगरीय निकाय सामान्य निर्वाचन में नगर निगम के महापौर और पार्षद के चुनाव ईवीएम से ही करवाए जाएंगे।

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा इन चुनावों के लिए 25 हजार कण्ट्रोल यूनिट और 50 हजार बैलेट यूनिट की मांग की गई थी, जिसे केन्द्रीय चुनाव आयोग ने स्वीकार करते हुए इन मशीनों को मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से मंगवाकर भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

आयोग के अनुसार आयोग के 31 मार्च के पत्र के संबंध में केन्द्रीय चुनाव आयोग ने अवगत करवाया कि ईवीएम की उपलब्धता की स्थिति की समीक्षा की गई। पाया गया कि मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के यहां पर्याप्त संख्या में ईवीएम हैं। इसलिए उत्तर प्रदेश के राज्य निर्वाचन आयोग से कहा गया कि वह अपनी जरूरत के अनुसार मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से सम्पर्क कर ईवीएम मंगा ले।

 

by : Tapsi Sharma

UP में केबल 58 बूचड़खाने वैध, देशभर में सिर्फ इतने है लाइसेंस।

नई दिल्ली:-अवैध बूचड़खानों पर योगी सरकार के शिकंजे के बाद अब खबर आ रही है कि देश में बहुत ऐसे बूचड़खाने हैं जो पंजीकृत नहीं है। बूचड़खानों के खिलाफ देश भर में मुहिम जारी है। हाल ही में आरटीआई से पता चला है कि देश में केवल 1,707 बूचड़खाने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत पंजीकृत हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के 8 राज्यों में एक भी बूचड़खाने पंजीकृत नहीं है।


UP में केबल 58 बूचड़खाने वैध, देशभर में सिर्फ इतने है लाइसेंस


तमिलनाडु, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा पंजीकृत बूचड़ाखाने हैं। जबकि, अरुणाचल प्रदेश और चंडीगढ़ समेत आठ राज्यों में एक भी बूचड़खाना पंजीकृत नहीं है। मध्यप्रदेश के नीमच के रहने वाले आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने बताया कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने उन्हें ये आंकड़े मुहैया कराए हैं। फूड लायसेंसिंग एंड रजिस्ट्रेशन सिस्टम के जरिये ये जानकारी प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा, देश में धड़ल्ले से अवैध बूचड़ाखने चल रहे हैं।

UP में केबल 58 बूचड़खाने वैध, देशभर में सिर्फ इतने है लाइसेंस


एफएसएसएआई के एक अफसर ने बताया कि अरणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा व नगर हवेली, दमन व दीव, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में एक भी बूचड़खाना खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत पंजीकृत नहीं है।

तमिलनाडु में 425, मध्यप्रदेश में 262 और महाराष्ट्र में 249 बूचड़खाने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत पंजीकृत हैं। यानी देश के कुल 55 फीसदी पंजीकृत बूचड़खाने इन्हीं तीन सूबों में चल रहे हैं। उत्तरप्रदेश में 58 बूचड़खाने पंजीकृत हैं। आंध्रप्रदेश में एक, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में नौ, असम में 51, बिहार में पांच, छत्तीसगढ़ में 111, दिल्ली में 14, गोवा में चार, गुजरात में चार, हरियाणा में 18, हिमाचल प्रदेश में 82, जम्मू.कश्मीर में 23, झारखंड में 11, कर्नाटक में 30, केरल में 50, लक्षद्वीप में 65, मणिपुर में चार और मेघालय में एक बूचड़खाने को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत पंजीकृत किया गया है। पेटा ने बताया है कि देश में अवैध या वैध बूचड़खानों की संख्या 30,000 से ज्यादा है।